Infra कंपनी को नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से लगभग ₹2,440.87 करोड़ का बड़ा हाईवे प्रोजेक्ट मिला है। कंपनी इस प्रोजेक्ट के लिए फाइनेंशियल बिड में L-1 (सबसे कम बोली लगाने वाला) बनी है और जानकारी 18 मार्च 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को दी गई है। यह प्रोजेक्ट नेशनल हाईवे-33 (NH-33) के ग्रीनफील्ड सेक्शन के निर्माण से जुड़ा है, जिससे कंपनी के ऑर्डर बुक में एक मजबूत बढ़ोतरी होगी।
प्रोजेक्ट का लोकेशन, साइज और समयसीमा
यह प्रोजेक्ट बिहार में Mokama से Munger के बीच 4-लेन ग्रीनफील्ड हाईवे सेक्शन के निर्माण के लिए है। हाईवे की कुल लंबाई लगभग 82.40 किलोमीटर है, जो डिजाइन चेनेज 0+000 से 82+400 तक फैला हुआ रहेगा। प्रोजेक्ट को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर विकसित किया जाएगा और इसे नियुक्ति तिथि से 910 दिनों (करीब दो साल से थोड़ा ज्यादा) के भीतर पूरा करना है।
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फंडिंग मॉडल और Infra सेक्टर के लिए महत्व
HAM मॉडल के तहत इस प्रोजेक्ट में सरकार और प्राइवेट कंपनी दोनों की भागीदारी रहती है, जिससे कैश फ्लो का रिस्क कम हो जाता है और लंबे समय तक स्थिर रेवेन्यू की संभावना रहती है। NH-33 कॉरिडोर बिहार के लिए एक अहम रोड लिंक है, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक सप्लाई और औद्योगिक गतिविधि को बढ़ाने में मदद कर सकता है। ऐसे बड़े हाईवे प्रोजेक्ट सरकार के नेशनल इन्फ्रा पाइपलाइन और सड़क विकास कार्यक्रमों के लिए भी सपोर्टिव माने जाते हैं।
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रेलवे ऑर्डर से मजबूत होती ऑर्डर बुक
हाईवे प्रोजेक्ट से पहले कंपनी को वेस्ट सेंट्रल रेलवे से लगभग ₹1,897.51 करोड़ का बड़ा रेलवे प्रोजेक्ट भी मिला है, जिसके लिए 17 फरवरी 2026 को लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस जारी हुआ है। यह रेल प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश में बहरी से गोंडावाली के बीच नई रेलवे लाइन के निर्माण से जुड़ा है और इसे EPC मोड पर करीब 900 दिनों की समयसीमा में पूरा करना है। दोनों प्रोजेक्ट मिलाकर कंपनी ने हाल के महीनों में कुल ₹4,300 करोड़ से ज्यादा के नए ऑर्डर बुक किए हैं, जिससे फ्यूचर रेवेन्यू विजिबिलिटी मजबूत होती दिखती है।
हालिया वित्तीय प्रदर्शन का संक्षिप्त अपडेट
हाल के तिमाही नतीजों में जीआर इन्फ्राप्रोजेक्ट्स की आय और मुनाफे में स्थिर प्रदर्शन देखने को मिला है। दिसंबर 2025 तिमाही में कंपनी की स्टैंडअलोन नेट सेल्स लगभग ₹2,039.49 करोड़ रही, जो पिछले साल के समान तिमाही की तुलना में करीब 36 प्रतिशत की ग्रोथ दिखाती है। वहीं, शुद्ध लाभ में भी सालाना आधार पर मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी बड़े प्रोजेक्ट्स लेने के बावजूद प्रॉफिटेबिलिटी को बनाए रखने में सक्षम है।
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