Penny Stock : कंपनी के शेयर में पिछले कुछ दिनों से जबरदस्त तेजी देखी गई है। शुक्रवार के कारोबार में यह शेयर 4 फीसदी से ज्यादा उछलकर 1.01 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 5 ट्रेडिंग सेशंस में शेयर लगभग 21 फीसदी चढ़ गया है, जिससे इसमें खरीदारी अचानक बढ़ गई है।
शेयर प्राइस और ताज़ा प्रदर्शन
बीएसई पर Reliance Communications का शेयर फिलहाल करीब 1 रुपये के आसपास ट्रेड हो रहा है, जो इसे पेननी स्टॉक कैटेगरी में रखता है। पिछले हफ्ते के भीतर इसमें लगभग 21 फीसदी की रैली देखने को मिली, जबकि शुक्रवार को अकेले ही शेयर में 4 प्रतिशत से अधिक की तेजी रही। कम प्राइस और अचानक आई वॉल्यूम स्पाइक की वजह से छोटे निवेशकों की नजर इस स्टॉक पर ज्यादा है।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समीक्षा याचिका
कंपनी के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल अनीश निरंजन नानावती ने 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दाखिल की है। इसमें 15 फरवरी 2026 के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि टेलीकॉम कंपनियों को दिया गया स्पेक्ट्रम कॉरपोरेट संपत्ति नहीं माना जा सकता और इसे दिवाला प्रक्रिया के तहत बेचा या पुनर्गठित नहीं किया जा सकता। याचिका में तर्क दिया गया है कि अगर स्पेक्ट्रम को दिवाला प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा, तो टेलीकॉम सेक्टर में इनसॉल्वेंसी लॉ लागू करना लगभग असंभव हो जाएगा।
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स्पेक्ट्रम को लेकर कानूनी बहस
कंपनी का कहना है कि उसने कभी भी स्पेक्ट्रम पर प्राकृतिक संसाधन के रूप में मालिकाना हक का दावा नहीं किया, बल्कि केवल लाइसेंस अवधि के दौरान इसके उपयोग के अधिकार को ही अपनी अमूर्त संपत्ति यानी इंटैन्जिबल एसेट के रूप में दिखाया है। दूरसंचार विभाग (DoT) भी अपने ट्रिपार्टाइट एग्रीमेंट में स्पेक्ट्रम उपयोग के अधिकार को एक तरह की संपत्ति मानता रहा है। ऐसे में याचिका के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला पूरे क्रेडिट मार्केट और बैंकों की रिकवरी पर असर डाल सकता है।
दिवाला प्रक्रिया और बैंकिंग सिस्टम पर असर
यह विवाद पहले से चल रहे उन मामलों से जुड़ा है, जिनमें एयरसेल लिमिटेड, एयरसेल सेलुलर लिमिटेड और डिशनेट वायरलेस जैसी कंपनियां 2018 में दिवाला प्रक्रिया में गई थीं और उन पर करीब 9,900 करोड़ रुपये की बकाया लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क था। बैंकों, खासकर एसबीआई समेत कर्जदाता संस्थानों ने दलील दी थी कि स्पेक्ट्रम उपयोग का अधिकार भी एक एसेट है, जिसे बेचकर कर्ज वसूला जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने हालांकि इसे सरकारी प्राकृतिक संसाधन माना और कंपनियों की संपत्ति नहीं, जिसके बाद अब इस फैसले की समीक्षा की मांग सामने आई है और आने वाले समय में अदालत का अगला कदम निवेशकों की निगाह में रहेगा।
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